छालीवुड फ़िल्म इंडस्ट्री को बदनाम करने वाले ब्लैकमेलर पत्रकार के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज

रायपुर। सोशल मीडिया पर कथित आपत्तिजनक और मानहानिकारक पोस्ट को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। मस्तूरी क्षेत्र निवासी उदय किशन रात्रे ने आरोप लगाया है कि उनके खिलाफ लगातार भ्रामक और अपमानजनक सामग्री प्रसारित की जा रही है, जिससे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा और पेशेवर छवि को नुकसान पहुंच रहा है।

शिकायत के अनुसार, मामला वर्तमान में डीजी कोर्ट में जस्टिस के समक्ष विचाराधीन है। इसके बावजूद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उन्हें अपराधी की तरह प्रस्तुत करने, जेल और जमानत से जुड़े संदर्भों को तोड़-मरोड़ कर प्रकाशित करने और फिल्म लाइन में काम शुरू करने जैसे कथनों के जरिए उनकी छवि धूमिल करने का प्रयास किया गया है। शिकायतकर्ता ने इसे सुनियोजित मानसिक उत्पीड़न और मानहानि करार दिया है।

इस संबंध में संबंधित थाने में धारा 174 बीएनएसएस के तहत एनसीआर (Non Cognizable Report) दर्ज की गई है। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि सोशल मीडिया अकाउंट्स के माध्यम से लगातार टारगेट कर पोस्ट किए जा रहे हैं, जिससे न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित करने की आशंका जताई गई है। पुलिस ने मामले को दर्ज कर जांच प्रारंभ कर दी है। शिकायतकर्ता ने निष्पक्ष जांच और दोषियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की मांग की है

बडे अखबार का धौस दिखाकर फिल्म पीआर से लूट

बतादे की सोशल प्लेट फार्म पर कह चुके हैं कि मेरा लिखा हुआ लेख को कुछ ही पढ पाते हैं किसी फिल्म को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन एक प्रतिष्ठित अखबार को ताबिर के इस कारनामे की भनक भी नहीं है।
छालीवुड फिल्म इंडस्ट्री के कई निर्माता और निर्देशक के कैरियर को चौपट करने का कारनामा करने में माहिर छालीवुड के ऐसे कुछ तथाकथित एक्ट्रेस से जुडकर बदनाम करने की हद भी पार कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि सोशल मीडिया की इस जंग का कानूनी अंजाम क्या निकलता है और क्या जांच में आरोप प्रमाणित हो पाते हैं या नहीं।

रचनात्मक समीक्षा के बजाय व्यक्तिगत टिप्पणियों और दूसरे समीक्षकों को नीचा

ताबिर खुद को फिल्म समीक्षक के रूप में पेश करते हैं और फिल्मों में काम करने का दावा भी करते हैं, लेकिन अभिनय का अ भी ताबीर को नहीं पता है,और पेशेवर आचरण को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि वे रचनात्मक समीक्षा के बजाय व्यक्तिगत टिप्पणियों और दूसरे समीक्षकों को नीचा दिखाने वाली भाषा का सहारा लेते हैं।

पहले भी इस तरह से छालीवुड के निर्माता, निर्देशक और कलाकारों को भी खबर छापने की धमकियाँ देते आ रहे हैं। धार्मिक आस्थाओं पर भी ताबिर हुसैन के अनर्गल शब्दों से आघात पहुंचाने का प्रयास किया जा चुका है। फिल्म जगत से जुड़े कई लोगों का मानना है कि स्वस्थ आलोचना किसी भी इंडस्ट्री को आगे बढ़ाती है, लेकिन व्यक्तिगत पूर्वाग्रह और एकतरफा टिप्पणियां माहौल को खराब करती हैं। आरोप है कि ताबीर अपने करीबी लोगों पर लिखने से परहेज़ करते हैं, जबकि अन्य के खिलाफ तीखी और विवादित बयानबाजी से नहीं चूकते। छालीवुड फिल्म इंडस्ट्री को गर्त में ले जाने वाले पाइजन का कार्य कर रहा।

चाटुकारिता से आकाओं को खुश और बाकी को नुकसान

कथित पत्रकार कहे जाने वाले ताबिर की चाटुकारिता के किससे इन्ही के वाट्सएप ग्रुप और cinema 36.com आकाओं का गुणगान के ढोल लिखते नजर आते हैं। छालीवुड फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कुछ लोगों ने उनकी कार्यशैली और मानसिकता को गैर-पेशेवर बताते हुए कहा है कि ऐसी प्रवृत्तियां छत्तीसगढ़ी फिल्म जगत की साख को नुकसान पहुंचा सकती हैं।

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